नकारात्मक सोच से छुटकारा How to Overcome Negative Thoughts in Hindi हम सब की जिंदगी एक गाड़ी की तरह है और इस गाड़ी का शीशा हमारी सोच, हमारा व्यवहार, हमारा नजरिया है बचपन में तो यह शीशा बिल्कुल साफ़ होता है, एकदम क्लियर। लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते है। हमारे आस-पास के लोगों की वजह से, हमारे वातावरण की वजह से, हमारे अपनों की वजह से हमारा खुद के बारे में विश्वास बदलता जाता है। मतलब इस शीशे पे लोगो की वजह से, वातावरण की वजह से, अपनी वजह से धूल, मिटटी, कचरा जमता जाता है। और इस धूल से भरे, मिटटी से भरे, कचरे से भरे शीशे को हमने अपनी हकीकत मान ली है। कहीं न कहीं हम उस शीशे को साफ़ करना भूल गये हैं। हम कुछ मान कर बैठे है, कुछ इच्छाओं के सामने हार मान ली है, कुछ सपनों को हमने छोड़ दिया है। कुछ बातों को हमने मान लिया है। जैसे किसी को लगता है कि मैं बिज़नस नहीं कर सकता हूँ क्योंकि मेरे पास पैसे नहीं हैं (खुद का बनाया हुआ विश्वास)। किसी को लगता है कि मैं अच्छे मार्क्स नहीं ला सकता क्योंकि मैं हमेशा एक एवरेज स्टूडेंट रहा हूँ तो यह है खुद का बनाया हुआ विश्वास.. उस शीशे को क...
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